आईपीएस

गुजरात के बनासकांठा जिले के पालनपुर शहर की एक सत्र अदालत ने 1996 के मामले में पूर्व भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी संजीव भट्ट को दोषी ठहराया।

बनासकांठा (गुजरात): पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को 20 साल की सजा सुनाई गई है. गुजरात कोर्ट ने एक वकील को फंसाने के लिए ड्रग्स प्लांट करने के जुर्म में यह सजा सुनाई है. गुजरात के बनासकांठा जिले के पालनपुर शहर की एक सत्र अदालत ने बुधवार (28 मार्च) को 1996 के मामले में पूर्व भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी संजीव भट्ट को दोषी ठहराया। किसी आपराधिक मामले में संजीव भट्ट की यह दूसरी सजा है। 2019 में जामनगर कोर्ट ने उन्हें हिरासत में मौत मामले में दोषी ठहराया था. बुधवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जेएन ठक्कर ने भट्ट को राजस्थान के एक वकील को झूठा फंसाने का दोषी ठहराया।

2015 में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया

संजीव भट्ट को 2015 में भारतीय पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। उस समय वह बनासकांठा जिले के पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत थे। राजस्थान के वकील सुमेर सिंह राजपुरोहित को जिला पुलिस ने 1996 में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत गिरफ्तार किया था।

Hotel से नशीली दवाएं जब्त की गईं

जिला पुलिस ने पालनपुर के उस होटल के कमरे से ड्रग्स जब्त करने का दावा किया है, जहां वकील राजपुरोहित ठहरे हुए थे. इस फैसले पर पूर्व पुलिस अधिकारी की पत्नी श्वेता ने नाराजगी जताई है. हालांकि, राजस्थान पुलिस ने बाद में कहा कि बनासकांठा पुलिस ने राजपुरोहित को राजस्थान के पाली में विवादित संपत्ति सौंपने का दबाव बनाने के लिए फंसाया था।

Police ने जांच के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था

पूर्व पुलिस निरीक्षक आईबी व्यास ने 1999 में गुजरात उच्च न्यायालय से मामले की गहन जांच का अनुरोध किया था। संजीव भट्ट को राज्य आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने सितंबर 2018 में एनडीपीएस अधिनियम के तहत नशीली दवाओं के अपराध के लिए गिरफ्तार किया था और तब से वह पालनपुर उप जेल में बंद हैं।

Supreme Court ने याचिका खारिज कर दी

पिछले साल पूर्व आईपीएस अधिकारी ने 28 साल पुराने ड्रग मामले में पक्षपात का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और मामले को दूसरे सत्र न्यायालय में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया था। उन्होंने निचली अदालत की कार्यवाही को रिकॉर्ड करने का निर्देश देने की भी मांग की। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने भट्ट की याचिका खारिज कर दी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *